अतीत का कालक्रम

पृथ्वी  लगभग 400 करोड़ वर्ष पुरानी मानी जाती है | माना जाता है कि पृथ्वी पर मानवों का उद्भव प्लाइस्टोसिन युग (Pleistocene epoch ) के आरम्भ में हुआ | प्लाइस्टोसिन युग आज से  लगभग 26 लाख वर्ष पूर्व से  11700 वर्ष पूर्व तक चला | इसे अंतिम हिमयुग भी कहा गया है |

‘ इतिहास ‘ में मानव के विकास , उनके संघर्ष , उत्थान – पतन तथा उनकी सांस्कृतिक उपलब्धियों के बारे में जानकारी प्राप्त किया जाता है | इस जानकारी प्राप्ति हेतु दो प्रकार के स्रोत उपलब्ध होते हैं – पुरातात्विक स्रोत एवं साहित्यिक स्रोत |

मानवों के इतने लम्बे अतीत को उनके  लिपि ज्ञान के आधार पर कालखंडों में विभाजित किया गया है – प्रागैतिहासिक काल , आद्य ऐतिहासिक काल  और ऐतिहासिक काल |

मानव अतीत का वह कालखंड जिसमे वह लेखन-कला एवं लिपि ज्ञान से पूर्णतः अपरिचित था , उस कालखंड को प्रागैतिहासिक काल कहा जाता है |

अतीत का वह कालखंड जिसमे मानव लेखन-कला ,  लिपि ज्ञान से परिचित तो था , परन्तु जिसे अबतक संतोषजनक रूप में पढ़ा नहीं जा सका है , उसे आद्य ऐतिहासिक काल कहा गया है |

वह कालखंड जिसके लिए पठनीय लिखित विवरण (  साधन ) उपलब्ध है उसे ऐतिहासिक काल कहा जाता है |

                 समय के  साथ    मानवों  ने अपनी सुरक्षा एवं भोजन प्राप्ति हेतु विभिन्न प्रकार के हथियारों  एवं  उपकरणों का निर्माण किया | किसी भी काल विशेष में  उपकरण – हथियार  निर्माण में प्रयुक्त सामग्री के आधार पर विद्वानों ने मानव सभ्यता  को दो भागों में विभक्त किया है  –     1. पाषाण युग एवं    2. धातु युग |

पुनः पाषाण  युग  को तीन भागों में विभक्त किया गया है  – पुरापाषाण काल , मध्यपाषाण काल, और नवपाषाण काल  | इसी प्रकार धातु युग को ताम्रपाषण युग , कांस्य युग , और  लौह युग में विभाजित किया गया है |

 

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